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MDU पीरियड चेक मामले में पुलिस ने आरोपियों को दी क्लीन चिट

पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में जमा करवाई, कोर्ट जल्द करेगी फैसला

Satyakhabarindia

Satyakhabar, Rohtak

MDU Periods check Case : रोहतक के एमडीयू पीरियड चेक मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है और इस मामले में जांच प्रक्रिया को पूरा करने के बाद अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में जमा करवा दी है। यह मामला सामने आने के बाद अब पीड़ित महिलाओं और इस मामले को उजागर करने वाले छात्र संगठनों ने धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। फिलहाल यह मामला कोर्ट में चला गया है और कोर्ट इस मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को फाइनल करती है या इसमें दोबारा जांच के आदेश करती है यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।
डी. एस. पी. रवि खुडिया ने बताया कि पुलिस की जांच में आरोपियों पर लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए। इस मामले में कोर्ट अपना फैसला देगी। बता दें कि एम.डी.यू. में 26 अक्तूबर को महिला सफाई कर्मचारियों के साथ सुपरवाइजर ने अभद्र व्यवहार करते हुए पीरियड्स की जांच करवाने के निर्देश दिए थे। महिलाओं से पीरियड्स के सबूत मांगने के मामले में पी.जी.आई. थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एस.सी. एस.टी. एक्ट में केस दर्ज किया था, लेकिन पुलिस की तरफ से एक बार भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया।
आरोप है कि महिला कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की धमकी भी दी गई। महिला कर्मचारियों ने मामले में सुपरवाइजर की शिकायत रजिस्ट्रार को दी। वहां से कार्रवाई न होने के बाद छात्र संगठनों को सूचना दी गई। महिला आयोग ने भी मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए एम.डी.यू. प्रशासन से रिपोर्ट मांगी। एम.डी. यू. की तरफ से जो रिपोर्ट महिला आयोग को दी उसमें 3 छात्र नेताओं पर ही मामला भड़काने का आरोप लगा दिया।

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न्याय के लिए हाईकोर्ट व सुप्रीम तक लड़ेंगे लड़ाई

छात्र नेता दिनेश कागड़ा ने बताया कि एम. डी. यू. प्रशासन पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। महिलाओं ने सभी सबूत दिए थे, लेकिन पुलिस की तरफ से भी मामले को रफा-दफा किया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की लड़ाई लड़ी जाएगी। साथ ही एम.डी.यू. में पीड़ित महिलाओं के साथ विरोध स्वरूप धरना दिया जाएगा।

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क्या था मामला

हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष 26 अक्टूबर को महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी पहुंचे थे। उस दिन कुछ महिला सफाई कर्मचारियों को काम पर पहुंचने में देरी हो गई। इस पर सुपरवाइजर विनोद कुमार और वितेंदर कुमार ने उन्हें रोक लिया और देर से आने का कारण पूछा। रिपोर्ट के मुताबिक पहले महिलाओं ने उन्हें टालने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माने तो बताया कि उनके पीरियड्स चल रहे हैं, इस वजह से आने में देरी हुई। इस पर सुपरवाइजर ने कथित तौर पर कहा कि वह बहाने बना रही हैं और अगर सच में पीरियड्स था तो सबूत दिखाएं। पीड़ित महिलाओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को बताया कि सुपरवाइजर ने एक महिला कर्मचारी से कहकर उनके कपड़े उतरवाए और सैनिटरी पैड की जांच भी करवाई। महिलाओं के अनुसार पुष्टि के लिए उनके सैनिटरी पैड की फोटो भी खींची गई। घटना के बाद महिलाओं ने जब यह बात अन्य साथी कर्मचारियों को बताई तो वह आग-बबूला हो गईं। महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों को जब यह बात पता लगी तो वह भी मौके पर पहुंच गए और घटना के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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